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मेरठ में पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के ठिकानों पर केंद्रीय एजेंसियों का 'सप्राइज विज़िट', दिनभर थमी रहीं सांसें!​CBI-ED की दस्तक या रूटीन जांच? पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के घर पहुंची टीमों ने मेरठ में बढ़ाई सियासी तपिश​शाहिद अखलाक के घर CBI और ED का डेरा! छापेमारी की खबरों के बीच पूर्व सांसद ने खोला 'लोन विवाद' का राज

**केंद्रीय एजेंसियों की टीम ने मेरठ में पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के आवास और फैक्ट्री पर की जांच, दिनभर गर्म रहा चर्चाओं का बाजार**
**मेरठ।**
शनिवार को मेरठ में पूर्व सांसद और प्रसिद्ध मीट कारोबारी शाहिद अखलाक के आवास तथा फैक्ट्री पर केंद्रीय एजेंसियों की मौजूदगी से दिनभर हड़कंप मचा रहा। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीमों ने कई घंटों तक दोनों परिसरों में मौजूद रहकर दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की गहन जांच की। हालांकि, देर शाम तक किसी भी एजेंसी ने इस कार्रवाई के उद्देश्य को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी या बयान साझा नहीं किया।
### सुबह ही धमक पड़ीं टीमें, खंगाले गए दस्तावेज
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय एजेंसियों की टीमें सुबह ही पूर्व सांसद के ठिकानों पर पहुंच गई थीं। अधिकारियों ने वित्तीय लेन-देन से संबंधित अभिलेखों के साथ-साथ डिजिटल उपकरणों, कंप्यूटर डेटा और कई अन्य महत्वपूर्ण फाइलों की पड़ताल की। इस दौरान कई पुराने रिकॉर्ड्स और वित्तीय दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन भी किया गया।
जैसे ही इस बड़ी कार्रवाई की सूचना शहर में फैली, गुड्डी बाजार और उसके आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और उनके समर्थकों की भारी भीड़ जुट गई। राजनीतिक और कारोबारी हलकों में दिनभर इस कार्रवाई की प्रकृति को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाती रहीं। अधिकारियों द्वारा मीडिया से दूरी बनाए रखने के कारण संशय की स्थिति और बढ़ गई।
### पूर्व सांसद का दावा: 'यह छापेमारी नहीं, ऋण विवाद का सत्यापन था'
दूसरी ओर, पूर्व सांसद शाहिद अखलाक ने अपने प्रतिष्ठानों पर किसी भी तरह की 'छापेमारी' की बात से साफ इनकार किया है। मामले पर अपना पक्ष रखते हुए उन्होंने कहा:
> "यह कोई छापेमारी नहीं थी। दरअसल, 'एलगाइजिम' नामक कंपनी के एक पुराने ऋण विवाद से जुड़े मामले में दस्तावेजों के सत्यापन के लिए टीम आई थी। यह मामला मुख्य रूप से पड़ोस से संबंधित है।"
शाहिद अखलाक ने आगे जानकारी दी कि उक्त कंपनी के निदेशक आफताब द्वारा डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में 89 लाख रुपये जमा कराकर पहले ही स्टे (स्थगन आदेश) प्राप्त किया जा चुका है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| **संबंधित कंपनी** | एलगाइजिम |
| **मामले की प्रकृति** | ऋण विवाद एवं दस्तावेज सत्यापन |
| **डीआरटी में जमा राशि** | 89 लाख रुपये (स्टे प्राप्त) |
| **कार्रवाई की स्थिति** | शांतिपूर्ण समापन, पूरा सहयोग दिया गया |
### जांच के बाद लौटीं टीमें, अगली हलचल पर टिकीं नजरें
पूर्व सांसद के अनुसार, जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों को मांग के मुताबिक सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए और उनकी ओर से पूरा सहयोग किया गया। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद टीमें शांतिपूर्ण ढंग से वापस लौट गईं। इस दौरान किसी भी प्रकार के विवाद या आपत्ति की स्थिति नहीं बनी।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर के सियासी और व्यापारिक गलियारों में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि यह जांच किसी बिल्कुल नए मामले से जुड़ी है या पूर्व में चल रहे किसी प्रकरण के सत्यापन का हिस्सा मात्र थी। वास्तविक स्थिति केंद्रीय एजेंसियों द्वारा कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी करने के बाद ही साफ हो सकेगी।

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