मेरठ।
शास्त्रीनगर सेक्टर तीन और चार के निवासियों और आवास विकास परिषद के बीच सेटबैक के मुद्दे पर विवाद गहराता जा रहा है। शनिवार को सेक्टर चार के चौराहे पर चल रहे धरना स्थल पर महिलाओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस (पत्रकार वार्ता) का आयोजन किया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आवास विकास के अधिकारी अपनी गलतियों को छुपाने के लिए आम जनता को मुसीबत में डाल रहे हैं।
अधिकारियों पर लगा अवमानना से बचने का आरोप
महिलाओं की तरफ से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता राकेश कुमार पाठक ने आवास विकास परिषद के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
"खुद के खिलाफ कोर्ट में अवमानना (Contempt of Court) का मामला दाखिल होने पर आवास विकास के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में 'सेटबैक' का नया शिगूफा छोड़ दिया। ऐसा करके अधिकारियों ने खुद का पिंड तो छुड़ा लिया, लेकिन शास्त्रीनगर के हजारों निवासियों को असमंजस और मुसीबत में डाल दिया है।"
सुप्रीम कोर्ट में 14 जुलाई को होनी है सुनवाई
अधिवक्ता पाठक ने जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट ने आवास विकास के अधिकारियों को सेटबैक को लेकर अपना बायलॉज (Bylaws) कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई की तिथि 14 जुलाई निर्धारित की गई है।
निवासियों का आरोप है कि जब मामला देश की सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है, इसके बावजूद आवास विकास के अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं और सभी मकानों में जबरन सेटबैक छोड़े जाने के नोटिस धड़ल्ले से जारी कर रहे हैं।
मकानों के जमींदोज होने का खतरा
शनिवार को भी आंदोलनकारियों ने आवास विकास के अधिकारियों को एक पत्र लिखकर मांग की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सेटबैक की सभी कार्यवाहियों और नोटिसों को तुरंत स्थगित किया जाए।
- बड़ा खतरा: निवासियों का कहना है कि यहाँ के अधिकांश मकान चार इंच की दीवार पर टिके हुए हैं।
- नुकसान: यदि सेटबैक के नाम पर मकानों के किसी भी हिस्से को तोड़ा गया, तो पूरा ढांचा कमजोर हो जाएगा और अधिकांश मकान जमींदोज (ध्वस्त) हो जाएंगे। इससे जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में पहले भी अधिकारियों को पत्र लिखे थे, लेकिन विभाग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। अब निवासियों ने साफ कर दिया है कि वे अपने आशियाने को बचाने के लिए कानूनी और जमीनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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