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मेरठ दिनांक 18.04.2026 को रात्रि 12:00 बजे सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम चामरौद में एक बड़ा मगरमच्छ सड़क पर घूम रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम पूरी तैयारी के साथ मौके पर पहुंची।
मौके पर पहुंचने पर मगरमच्छ झाड़ियों के अंदर पूर्णतया छिप (कैमोफ्लेज) गया था, जिससे रेस्क्यू कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया। टीम द्वारा झाड़ियों की कटाई कर तथा रणनीतिक तरीके से घेराबंदी करते हुए उसे एक पशु-आवास (घेर) की ओर नियंत्रित किया गया। चूंकि मगरमच्छ पूर्णतः वयस्क एवं आक्रामक अवस्था में था, तथा पीछे से पकड़ने का कोई सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं था, इसलिए टीम को मौके की स्थिति देखते हुए सामने से ही अत्यंत सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन करना पड़ा ऐसे ऑपरेशन अत्यंत जोखिमपूर्ण होते हैं जिसमें मगरमच्छ को सामने से नियंत्रित कर पकड़ना पड़ता है, क्योंकि चौकन्ना और आक्रामक मगरमच्छ अचानक हमला करता है। करीब 2 घंटे की काफी मशक्कत के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ा गया।
इसके उपरांत उक्त मगरमच्छ को गंगा नदी में सुरक्षित रूप से रिलीज कर दिया गया।
मगरमच्छ का विवरण:–
प्रजाति– मगर (Mugger Crocodile)
लंबाई:–लगभग 2.25 मीटर
वजन:– लगभग 1.5 कुंटल (150 किलोग्राम)
अवस्था: पूर्ण वयस्क (Adult)
वन क्षेत्राधिकारी, हस्तिनापुर खुशबू उपाध्याय की टीम में सेक्शन प्रभारी अंकित यादव , ऋषभ सिंह (वन दरोगा)
, नितिन कुमार वन रक्षक, अतुल स्वामी बन रक्षक, नितिन त्यागी एवं अन्य
वाचरगण ।
मगरमच्छ (Mugger Crocodile),
भारत में पाए जाने वाला सामान्य मगरमच्छ मार्श क्रोकोडाइल (Crocodylus palustris) कहलाता है
यह नदियों, तालाबों, झीलों और दलदली क्षेत्रों में पाया जाता है।
इसका स्वभाव अत्यंत सतर्क (Alert),
अवसरवादी शिकारी (Opportunistic predator), खतरा महसूस होने पर तुरंत आक्रामक होता है। इसका भोजन मछली, पक्षी, छोटे/मध्यम स्तनधारी
यह धूप में बैठकर शरीर का तापमान नियंत्रित करता है (Basking behavior)।
गंगा नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल एवं डॉल्फिन पाए जाते हैं।
गंगा नदी की सरीसृप प्रजातियों में एक और महत्वपूर्ण प्रजाति घड़ियाल (Gharial) है।
वैज्ञानिक नाम: Gavialis gangeticus
लंबी व पतली थूथन (snout)
मुख्यत मछली खाने वाला जीव है।
गंगा नदी भारत की सबसे समृद्ध जैव-विविधता वाली नदियों में से एक है
इसमें मगरमच्छ (Mugger Crocodile), घड़ियाल (Gharial), गंगा डॉल्फिन कछुए एवं अन्य विभिन्न प्रकार की मछलियां, जल-पक्षी (Migratory birds) पाए जाते हैं।
गंगा की प्रभागीय वनाधिकारी सुश्री वंदना ने बताया कि मेरठ वन प्रभाग यह संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) एक-दूसरे जीव एवं पर्यावास पर निर्भर है।जैव-विविधता संरक्षण हेतु रेस्क्यू ऑपरेशंस, प्रजाति संवर्धन एवं शिकार पर रोकथाम करते हुए लगातार तत्पर है।
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