मेरठ। ऐतिहासिक और कौमी एकता के प्रतीक मेला नौचंदी को शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद मेले की रौनक अभी तक फीकी नजर आ रही है। स्थिति यह है कि मेले के कई प्रमुख बाजारों में अभी भी बड़ी संख्या में दुकानें खाली पड़ी हैं। दुकानों का आवंटन होने के बाद भी दुकानदारों द्वारा दुकान न लगाए जाने पर अब जिला पंचायत प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्रशासन ने ऐसी दुकानों का ठेका निरस्त कर दोबारा ठेका छोड़ने (नीलामी) की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
तीन बाजारों में पसरा सन्नाटा, जिला पंचायत की कार्रवाई
मेला नौचंदी के मुख्य आकर्षण रहने वाले तीन प्रमुख बाजारों—गोल बाजार, नया बाजार और तीन बाजार में इस बार हालात जुदा हैं। इन बाजारों में दर्जनों दुकानें आवंटित तो कर दी गई थीं, लेकिन आवंटन के कई दिन बाद भी दुकानदारों ने वहां अपना सेटअप नहीं लगाया।
दुकानें खाली रहने से मेले का आकर्षण कम हो रहा है और जिला पंचायत के राजस्व पर भी इसका असर पड़ रहा है। इसी के मद्देनजर जिला पंचायत ने लापरवाही बरतने वाले ठेकेदारों और दुकानदारों के आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। अब इन खाली दुकानों के लिए दोबारा ठेका प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
सुस्ती की मार: शनिवार-रविवार को छोड़कर भीड़ नदारद
आमतौर पर मई के महीने में नौचंदी मेला अपने पूरे शबाब पर होता है, लेकिन इस बार दुकानदारों और व्यापारियों के चेहरे उतरे हुए हैं। बीते दिनों के रुझान को देखें तो शनिवार और रविवार की छुट्टी को छोड़कर बाकी दिनों में मेले में खासी भीड़ नजर नहीं आ रही है। कामकाजी दिनों (Weekdays) में मेले के रास्ते सूने दिखाई दे रहे हैं, जिससे व्यापारी वर्ग चिंतित है। अब देखना यह होगा कि दोबारा ठेका छूटने के बाद क्या ये दुकानें समय रहते लग पाएंगी और मेले में रौनक लौट सकेगी या फिर इस बार ये बाजार खाली ही रहेंगे।
पटेल मंडप में दर्शकों का टोटा, सांस्कृतिक कार्यक्रम फीके
मेला नौचंदी की सांस्कृतिक आत्मा कहे जाने वाले पटेल मंडप का हाल भी इस बार बेहाल है। उद्घाटन के पहले दिन से लेकर अभी तक आयोजित हुए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दर्शकों का भारी अभाव देखने को मिल रहा है।
खाली पड़ी कुर्सियां: पटेल मंडप में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान सामने लगी कुर्सियां दर्शकों की राह तकती नजर आती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रचार-प्रसार की कमी और भीषण गर्मी के कारण लोग कार्यक्रमों में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं, जिसके चलते कलाकारों को खाली कुर्सियों के सामने अपनी प्रस्तुति देनी पड़ रही है।
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