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मेरठ कलेक्ट्रेट पर भाकियू का जोरदार घेराव: लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे किसान, सुरक्षा सख्त​अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप, आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

मेरठ। रिपोर्टर नवेद खान 

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के आह्वान पर सोमवार को जिले भर के किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट का पूर्ण घेराव किया। सुबह से ही विभिन्न गांवों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों के काफिले के साथ शहर की ओर जुटने शुरू हो गए थे। सैकड़ों की संख्या में भाकियू कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर की ओर कूच कर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

​ज्ञापन और बैठकों के बावजूद नहीं निकला हल: अनुराग चौधरी

​भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए प्रशासनिक रवैये पर कड़ा रोष जताया। उन्होंने कहा कि कई बार ज्ञापन सौंपने और 'किसान दिवस' की बैठकों में प्रमुखता से मुद्दे उठाने के बाद भी अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।

​"प्रशासन किसानों की समस्याओं को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। हद तो तब हो जाती है जब जिलाधिकारी से मिलने का समय मांगने पर भी किसानों को मुलाकात तक नहीं दी जाती। इसी उपेक्षा के विरोध में आज किसानों को कलेक्ट्रेट का घेराव करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।" — अनुराग चौधरी, जिलाध्यक्ष (भाकियू टिकैत)


​किसानों की ये हैं 5 मुख्य मांगें

​प्रदर्शनकारी किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के समक्ष 5 प्रमुख बिंदु रखे हैं:

  • ​पर्याप्त खाद आपूर्ति: सहकारी समितियों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए और वितरण में हो रही अनियमितताओं पर तुरंत रोक लगे।
  • ​बकाया गन्ना भुगतान: गन्ना किसानों का लंबे समय से अटका भुगतान ब्याज सहित जल्द से जल्द जारी किया जाए।
  • ​बिजली भार में राहत: किसानों पर बढ़ाए गए बिजली के अतिरिक्त भार को वापस लिया जाए।
  • ​तहसील स्तर पर भ्रष्टाचार पर लगाम: तहसीलों में व्याप्त भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों पर सख्त कार्रवाई हो।
  • ​लोक निर्माण विभाग (PWD) के मामले: पीडब्ल्यूडी से जुड़े विकास कार्यों और सड़कों के लंबित मुद्दों का त्वरित समाधान किया जाए।

​कलेक्ट्रेट परिसर में छावनी जैसा माहौल

​किसानों के बड़े प्रदर्शन और संभावित हंगामे को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन अलर्ट मोड़ पर नजर आया। कलेक्ट्रेट के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रहे।

​जब तक हल नहीं, तब तक हटेगा नहीं किसान

​किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन केवल सांकेतिक नहीं है। जब तक प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आकर उनकी सभी मांगों पर लिखित या ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक कलेक्ट्रेट परिसर में किसानों का धरना और घेराव जारी रहेगा।

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